नागरिकता अधिनियम 1955 Citizenship Act 1955

चुकीं संसद को यह अधिकार हैं की वो नागरिकता से सम्बन्धित कानून बनाये इसलिए संसद ने नागरिकता अधिनियम 1955 Citizenship Act 1955 बनाया।

नागरिकता अधिनियम 1955 संविधान लागू होने के बाद अर्जन एंव समाप्ति के बारे में उपबन्ध करता हैं। इस अधिनियम को अब तक 5 बार संसोधीत किया हैं।

  1. नागरिकता संसोधन अधिनियम 1986
  2. नागरिकता संसोधन अधिनियम 1992
  3. नागरिकता संसोधन अधिनियम 2003
  4. नागरिकता संसोधन अधिनियम 2005
  5. नागरिकता संसोधन अधिनियम 2015

नागरिकता का अर्जन

नागरिकता अधिनियम 1955 Citizenship Act 1955 नागरिकता प्राप्त करने की 5 शर्ते बताता हैं।

  1. जन्म से
  2. वंशानुगत
  3. पंजिकरण
  4. प्राकृतिक
  5. क्षेत्र समावष्टी के आधार पर

जन्म से प्राप्त नागरिकता :- 1 जुलाई 1947 से पूर्व जन्मा व्यक्ति माता-पिता के जन्म की राष्ट्रीयता भले ही कहीं की हो उसके बावजूद वो भारत का नागरिक होगा।

1 जुलाई 1947 के बाद जन्मा व्यक्ति केवल तभी भारत का नागरिक माना जायेगा यदि उसके माता-पिता में से कोई एक भारतीय नागरिक हो

इसके अलावा यदि किसी व्यक्ति का जन्म 3 दिसम्बर 2004 के हुआ हो तो वो उसी दशा में भारत का नागरिक माना जायेगा यदी उसके माता-पिता जन्म के समय भारत के नागरिक हो तथा अवैध प्रवासी नहीं हो।

नोटः- लेकिन भारत में पदस्थ विदेशी राजनायिकों के बच्चे जो भारत में जन्में ले वे भारत की नागरिेकता अर्जन नहीं कर सकते तथ शत्रु देश के बच्चे भी भारत की नागरिेकता अर्जन नहीं कर सकते हैं।

पंजीकरण द्वारा नागरिकता :-अवैध प्रवासियों को छोड़कर केन्द्र सरकार किसी भी व्यक्ति को भारतीय नागरिक बना सकती हैं इसके लिए कुछ श्रेणियां घोषित की हैं जो निम्न प्रकार हैं।

  • भारतीय मूल का व्यक्ति आवेदन देने से 7 वर्ष पूर्व वो व्यक्ति भारत में रह चुका हो।
  • भारतीय मूल का व्यक्ति जो अविभाजित भारत के बाहर या किसी अन्य देश में अन्यत्र रह रहा हो।
  • वह व्यक्ति जिसने भारतीय नागरिक से विवाह किया हो और आवेदन से पूर्व 7 वर्ष से भारत में रह रहा हो
  • भारत के नागरिक के नाबालिक बच्चे ।
  • कोई व्यक्ति जो पूरी आयु तथा क्षमता का हो तथा उसके माता पिता भारत के नागरिक के रूप में पंजीकृत हों और आवेदन से पूर्व 1 वर्ष से भारत में रह रहा हो।
  • कोई व्यक्ति जो पूरी आयु व क्षमता का हो तथा वह समुद्र पार किसी देश के नागरिक के रूप में पाॅंच वर्ष से पंजीेेकृत हो व आवेदन से पूर्व1 वर्ष से भारत में रह रहा हो वो भारत का निवासी माना जा सकता हैं।

प्राकृतिक रूप से नागरिकता :- केन्द्र सरकार चाहे प्राकृतिक रूप से नागरिकता प्रमाण पत्र प्रदान कर सकती हैं लेकिन इसके लिए नीचे दी गयी योग्यता रखता हों।

  • कोई व्यक्ति ऐसे देश से सम्बन्धित नही हो जहां भारतीय नागरिक प्राकृतिक रूप से नागरिक नहीं बन सकते।
  • व भारतीय नागरिकता प्राप्त करने से पूर्व किसी अन्य देश की नागरिकता त्याग दे
  • यदी वो भारत में रह रहा हो या भारत सरकार की सेवा में हो तथा आवेदन देने से पूर्व 12 माह भारत में रह रहा हो ।
  • उसका चरित्र अच्छा हो
  • वह संविधान की अनुसुची 8 में दी गयी भाषा का ज्ञान रखता हो
  • वह भारत में रहने के लिए इच्छुक हो और भारत सरकार की सेवा को जारी रखता हो।

क्षेत्र समाविष्टि द्वारा :- अगर कोई विदेशी क्षेत्र भारत का हिस्सा बनता हैं तो भारत सरकार उस क्षेत्र से सम्बन्धित विशेष व्यक्तियों को भारत का नागरिेक घोषित कर सकती हैं

नागरिेता अधिनियम 1955 के तहत नागरिकता समाप्ति का भी उल्लेख हैं।

इसके तहत नागरिकता खोने के तीन कारण बताये हुए हैं

  • स्वैच्छिक त्यागः-यदि कोई भारतीय नागरिक स्वेच्छा से अपनी नागरिकता का त्याग कर दे ए तो उसकी भारतीय नागरिकता समाप्त हो जएगी
  • वंचित करने के द्वारा रू.भारत सरकार को निम्न विधियों से नागरिको को नागरिकता से वंचित करने का अधिकार है
  • नागरिक भारत से बहार लगातार 7 वर्षो से में रह रहा हो ।
  • यदि किसी व्यक्ति ने अवैध तरीको से भारतीय नागरिकता प्राप्त की हो ।
  • यदि कोई व्यक्ति देश विरोधी गतिविधयो में संलिप्त हो ।
  • यदि व्यक्ति भारतीय संविधान का अनादर करे ।
  • बर्खास्तगी सेरू. यदि कोई भारतीय नागरिक स्वेच्छा से किसी और देश की नागरिकता ग्रहण कर ले तो उसकी भारतीय नागरिकता बर्खास्त कर दी जायेगी

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Author: RPSC GURU

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