यूरोपीय कम्पनियों का आगमन-अंग्रेज

यूरोपीय कम्पनियों का आगमन में डचो के बाद अंग्रेज भारत आये!

1599 में लन्दन के कुछ व्यापारियों ने मिलकर एक सभा बने जिसका अध्यक्ष लार्ड मेयर था

इस सभा ने पूर्व के देशो में व्यापर की योजना बनायीं

और कम्पनी बनायीं “गवर्नर एंड कम्पनी ऑफ़ मर्चेंट्स ऑफ़ लन्दन ट्रेडिंग इन टू द ईस्ट इंडीज” नाम रखा गया

31 दिसम्बर 1600 को महारानी एलिजबोथ ने के आज्ञापत्र से पूर्व में व्यापर की शुरुआत की 15 वर्षो के लिए आज्ञा दी \

इस कम्पनी में 24 सदस्य होते थे जिन्हें कोर्ट of डायरेक्टर्स कहा जाने लगा

1609 ई का चार्टर :- 1603 में एलिजबोथ की म्रत्यु के बाद जेम्स प्रथम शासक बना 1609 में कम्पनी को चार्टर जारी किया जिसमे बहुत सारे अधिकार कम्पनी को दिए जैसे किले बनाना ,सेनाये रखना .युद्ध करना संधि करना , न्याय करना आदि और कम्पनी

कम्पनी का व्यापर पर एकाधिकार था लेकिन फिर भी कई स्वतंत्र सौदागर भी थे जिन्हें “दस्तंदाज” कहते थे

1688 में इंग्लैंड में क्रांति हुई शासक जेम्स द्वितीय का तख्ता पलट कर दिया गया और “सता ह्विग पार्टी” के हाथो में आई  यह पार्टी व्यापारिक एकाधिकार के पक्ष में नही थी

परिणामस्वरूप इसने “न्यू कम्पनी” नाम की एक व्यापारिक संस्था बनायीं

तो पुराणी कम्पनी  इससे सहमत नही थी उसने इस कम्पनी का एक जहाज रोक दिया समुद्र में

जिसका परिणाम यह हुआ की 1694 में हाउस of कॉमंस में एक प्रस्ताव पारित हुआ प्रस्ताव के तहत सभी अंग्रेजो को पूर्व में व्यापर करने का अधिकार होगा जब तब सरकार चाहेगी

फिर 1698 में इंग्लैंड ने वितीय संकट से उबरने के लिए व्यापर की नीलामी लगा दी

नीलामी :- न्यू कम्पनी ने व्यापर खरीद लिया 20 लाख पोंड देकर

लेकिन उसको व्यापर के क्षेत्र में सफलता नही मिली और पुरानी कम्पनी और नयी कम्पनी के बिच समझोता हुआ

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Author: RPSC GURU

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