Geological Time Scale in Hindi

Geological Time Scale in Hindi

Geological Time Scale in Hindi जिसे हिंदी में भूवैज्ञानिक समय सारणी कहते हैं!

पृथ्वी की उत्पति के साथ भूगर्भिक समय सारणी की शुरुआत होती हैं भूगर्भिक समय सारणी के द्वारा हम जान सकते हैं की पृथ्वी पर चट्टानों की उत्पति कब हुई पृथ्वी पर जीव की उत्पति कब हुई और साथ साथ अनेक प्रकार के पर्वत , पठार मैदानों की उत्पति कब हुई – Geological Time Scale in Hindi

भूगोल विषय को समझने के लिए हमें Geological Time Scale को समझना होगा


Geological Time Scale को 5 महाकल्प ( ERA ) में बांटा हुआ हैं
4 कल्प(epoch) में बांटा हुआ हैं
18 युग (period) में बांटा हुआ हैं
इन अलग अलग युग के द्वारा पृथ्वी पर पायी जाने वाली चट्टानों का पता लगाया जा सकता हैं आप पढ़ रहे हैंGeological Time Scale in Hindi

भूगर्भिक समय सारणी के 5 महाकल्प इस प्रकार हैं

  • अजोइक महाकल्प
  • पैलियोजोइक महाकल्प
  • मेसोजोइक महाकल्प
  • सेनोजोइक महाकल्प
  • निओजोइक महाकल्प
महाकल्प Eraकल्प epoch युग PERIOD
अजोइक महाकल्प कोई कल्प नही प्री-कैम्ब्रियन युग
यां
आर्कियन युग
पैलियोजोइक महाकल्प प्राइमरी कल्पकैम्ब्रियन युग
ओर्डोविसियन युग
सिलुरियन युग
डेवोनियन युग
कार्बनीफेरस युग
पर्मियन युग
मेसोजोइक महाकल्प सेकेंडरी  कल्पट्रिएशिक युग
जुरैसिक युग
क्रिटेशस युग
सेनोजोइक महाकल्प टर्शियरी  कल्पइओसीन युग
ओलिगोसीन युग
मायोसीन युग
प्लायोसीन युग
निओजोइक महाकल्प क्वार्टनरी   कल्प प्लीस्टोसीन युग
होलोसीन युग
मेघालय युग

इस सारणी को समझने के लिए यह विडियो देखें

प्री-कैम्ब्रियन युगमें जीव की उत्पत्ति नहीं हुई थी इसलिए इसे प्रीकैंब्रियन काल कहते हैं प्री-कैम्ब्रियन युग में केवल चट्टानों की उत्पति हुई थी लेकिन उसके बाद जीव की उत्पत्ति होती है और उस समय इसे कैंब्रियन युग की शुरुआत करते हैं तो इसलिए कैंब्रियन काल से हम वास्तविक भूगर्भिक समय सारणी की शुरुआत करते है आप पढ़ रहे हैं Geological Time Scale in Hindi इसी भूगर्भिक समय सारणी के द्वारा हम यह पता लगाते हैं कि जैसे हिमालय पर्वत की उत्पत्ति कब हुई जैसे प्रायद्वीपीय पठार की उत्पत्ति कब हुई या उत्तर के मैदान की उत्पत्ति कब हुई या थार के मरुस्थल की उत्पत्ति कब हुई यह सब भूगर्भिक समय सारणी से पता लग सकते हैं लगा सकते हैं विडियो क्लास में इसमें विस्तार से बताया गया हैं इस पूरी सारणी की व्याख्या की हुई हैं

Author: RPSC GURU

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