Physical Division of India

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Physical Division of India  भारत के भौतिक प्रदेश

भौतिक प्रदेश अर्थात जहां हम रह रहे हैं स्थलमंडल पर तो यहाँ उपस्थित पर्वत ,पहाड़ , पठार ,वन ,वनस्पति  आदि का किसी क्षेत्र विशेष मे अध्यन भौतिक प्रदेश कहलाता हैं

भौतिक दृष्टि से भारत को मुख्य रूप से 6 भागो में बांटा गया हैं

  • उत्तर का पर्वतीय प्रदेश

  • उत्तर का विशाल मैदान

  • प्रायद्वीपीय पठार

  • तटीय मैदान

  • द्वीप समूह

PHYSICAL DIVISION OF INDIA

Physical Division of India में अब हम पढ़ते हैं

उत्तर का विशाल मैदान

भौतिक प्रदेश मे हमने हिमालय पढ़ा में अब हम पढ़ते हैं उत्तर का विशाल मैदान हैं

नाम से तो यह उत्तर का विशाल मैदान है लेकिन वास्तविकता में भौतिक प्रदेशों में विशाल प्रायद्विप्य  पठार है ना की उत्तर का मैदान इसका क्षेत्रफल 7 लाख वर्ग किलोमीटर हैं

उत्तर का मैदान विश्व का सबसे अधिक उपजाऊ और घनी आबादी वाला भू-भाग हैं

यह हिमालय के दक्षिण में हैं हिमालय के निर्माण के बाद बना यह एक नवीनतम भूखंड है, जो सिन्धु-गंगा और ब्रह्मपुत्र का नदियों के बीच फैला हुआ हैं

पूर्व से पच्छिम इसकी लम्बाई 2400 km हैं और चौड़ाई पच्छिम में 500 KM तथा पूर्व में घटते हुए 145-150 KM हो जाती हैं

समुद्र  तल से इसकी ऊंचाई 150 KM हैं

नोट:- भारत का वर्तमान समुद्र तल चेन्नई (तमिलनाडू ) से नापा जाता हैं

यह मैदान दिल्ली, उत्तरी राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, उत्तरी और पच्छिमी बिहार , उत्तर-प्रदेश, बंगाल और असम राज्यों में है

यह मैदान टेथिस सागर का अवशेष है (जितने भी मैदान है वे टेथिस सागर के ही अवशेष हैं )

इस मैदान के निर्माण को समझने के लिए हमें महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत  को समझना होगा

उत्तर का विशाल मैदान भी टेथिस सागर का अवशेष हैं

मिट्टी की विशेषता और ढाल के आधार पर उत्तर के मैदान का  वर्गीकरण इस प्रकार हैं :-

भाभर ,तराई ,बांगर, खादर,रेह ,भूड़ डेल्टाई मिट्टी क्षेत्र इनके बारे में आप पहले एक विडियो में जान चुके हैं इस विडियो के description में मैदान के वर्गीकरण के उस विडियो की लिंक दी हुई हैं

धरातलीय विशेषताओं के आधार पर मैदान :

धरातलीय विशेषताओं के आधार पर उत्तर के मैदान को कई भागो में बांटा हैं जैसे

सिंधु का मैदान या (पंजाब का मैदान), गंगा का  मैदान, बिहार का संक्रमण क्षेत्र, बंगाल डेल्टा,असम का मैदान आदि

सिन्धु का मैदान /पंजाब का मैदान

vयह मैदान सिंधु नदी के पश्चिम में है। यह लगभग लगभग बांगर से बना है।

इस मैदान के उत्तरी भाग में चीका मरुस्थल है, जबकि दक्षिणी भाग में रेत और दोमट मिट्टी है और पूर्वी भाग डेल्टाई प्रकार का है, जो कच्छ के रन की दलदली मिट्टी में मिल जाता हैं

उत्तरी विशाल मैदान का यह सबसे पश्चिमी भाग है. पांच प्रमुख नदियों झेलम, चिनाव, रावी, सतलुज और व्यास का जल प्राप्त करने के कारण यह पंजाब कहलाता है. Physical Division of India

गंगा का मैदान

vपश्चिम में यमुना और पूर्व में ब्रह्मपुत्र के बीच का समतल भाग है, जिसकी ढाल दक्षिण पूर्व की ओर है. ढाल इतना मंद है कि साधारणतया पता नहीं चलता

vयह क्षेत्र प्राकृतिक वनस्पति से ढका रहता है हरियाणा और दिल्ली राज्य सिंधु और गंगा नदी तंत्रों के बीच जल विभाजक है

ब्रह्मपुत्र का मैदान

उत्तरी विशाल मैदान का सबसे पूर्वी भाग ब्रह्मपुत्र का मैदान है जिसकी ढाल पूर्व से पश्चिम की ओर है

यह मैदान लगभग 600 किलोमीटर लंबा और 100 किलोमीटर चौड़ा हैं. इसकी सामान्य ऊंचाई 150 मीटर है.

इस मैदान में भीषण बाढ़ आती है, और इससे भारी क्षति पहुंचती है.

इस मैदान को पार कर ब्रह्मपुत्र नदी पश्चिम की ओर मुड़ती है और गंगा से मिलकर डेल्टा बनाती है. गंगा ब्रह्मपुत्र की संयुक्त धारा मेघना कहलाती है.

गंगा नदी तन्त्र और डेल्टा के लिए गंगा नदी का विडियो देखे प्लेलिस्ट से

भाबर

इसे जलोढ़ पंख भी कहते हैं (जलोढ़ अर्थात जल को ओढ़कर लाना ) साधारण शब्दों में कहे तो “हिमालय से नदिया निचे उतरती हैं तो अपने साथ कंकड़ पत्थर लाती हैं तो वे  कंकड़ पत्थर ऊपर रह जाते हैं नदिया निचे की और बहने लगती हैं  अर्थात हम यह कह  सकते हैं की यहाँ पर नदिया अदृश्य /लुप्त हो जाती हैं यह क्षेत्र कृषि योग्य नहीं होता हैं यह हिमालय से बिल्कुल निचे गिरीपाद में होता हैं गिरी पाद अर्थात पहाड़ के पैर इसका क्षेत्रफल 08-16 km होता हैं ! Physical Division of India

खादर

जो हिमालय से नदी उतरती हैं तो बांगर और तराई को पार करके आगे अपने साथ कुछ उपजाऊ मिट्टी  लाती हैं इसी उपजाऊ मिट्टी को खादर कहते हैं ! Physical Division of India

बांगर

खादर उपजाऊ भूमि होती हैं ठीक इसके विपरीत जब नदी उपजाऊ मिट्टी लाती हैं कुछ समय बाद वो नदी उस स्थान से प्रवाहित नहीं होकर अपना रास्ता बदल लेती हैं तो जो पुराना नदी द्वारा उपजाऊ क्षेत्र था वो धीरे धीरे अनुपजाऊ हो जाता हैं उसे ही बांगर कहते हैं ! Physical Division of India

रेह

इसे कल्लर भी कहते हैं सिंचाई ज्यादा होने पर भूमि के ऊपर एक नमकीन जैसी परत बन जाती हैं उसी परत को रेह या कल्लर कहते हैं !

डेल्टा

जब नदिया बहती हैं तो अपने साथ कुछ अवसाद लाती हैं अवसाद का मतलब होता हैं (मिटटी,कंकड़ ,पत्थर,वनस्पति ) तो जब नदी अपने मुहाने पर पहुँचती हैं यानी अंतिम स्थान पर तो एक त्रिभुजाकार आकृति बनाती हैं उसी आकृति को डेल्टा कहते हैं !

ज्वारनदमुख

इसका दूसरा नाम एच्छुरी हैं जो नदिया त्रिभुजाकार डेल्टा नहीं बनाकर सीधे समुद्र में गिर जाती हैं जिस तरह समुद्र में ज्वार ऊपर उठकर गिरता हैं इसी प्रकार एच्छुरी बनाने वाली नदिया समुद्र में सीधी गिरती हैं !

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