भारत का संविधान-संघ एवं राज्य क्षेत्र [अनुच्छेद 1 से 4]
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भारत का संविधान-संघ एवं राज्य क्षेत्र [अनुच्छेद 1 से 4]

Union and Territory [Part-1 of the Constitution] Articles 1 to 4

संविधान में कुल 22 भाग हैं उनमे से भाग 1 के बारे में आज हम पढ़ने जा रहे हैं संविधान के भाग 1 में भारत का संविधान-संघ एवं राज्य क्षेत्र [अनुच्छेद 1 से 4] तक की चर्चा की गयी हैं

अनुच्छेद-1:- भारत राज्यों का संघ हैं

अनुच्छेद-2:- नये राज्यों का प्रवेश

अनुच्छेद-3 :- नये राज्यों का निर्माण व वर्तमान राज्यों के सीमाओं में और नामों में परिवर्तन

अनुच्छेद-4 :- अनु. 2 व 3 में परिवर्तन की शर्ते

भारत का संविधान-संघ एवं राज्य क्षेत्र [अनुच्छेद 1 से 4] तक की व्याख्या

अनुच्छेद-1ः- भारत राज्यों का संघ हैं, अर्थात भारत राज्यो का समुह न होकर राज्यों का संघ होगा। राज्यों का संघ का अर्थ हैं कि भारतीय संघ राज्यों के बीच में कोई समझौते का परिणाम नहीं हैं जैसा की अमेरिका में हैं अर्थात राज्यों को संघ से अलग होने का अधिकार नहीं है। संविधान सभा ने  भारत का नाम ’’इंडिया‘‘ जो की ‘‘भारत’’ हैं को चुना गया। तथा भारत के क्षेत्र तीन प्रकार के होंगे 1 राज्य क्षेत्र 2 संघ क्षेत्र व 3 अर्जित किये गये क्षेत्र

भारत का संविधान-संघ एवं राज्य क्षेत्र [अनुच्छेद 1 से 4] तक में अब हम जानते हैं अनुच्छेद 2 को

अनुच्छेद-2ः- नये राज्यों का प्रवेश, अनुच्छेद 2 नें संसद को यह शक्ति दी हैं की विधि द्वारा संसद जो ठीक समझे संघ में नये राज्यों की स्थापना कर सकेगी। अर्थात वो नये राज्यों को भारत संघ में शामिल कर सकते हैं जो पहले से भारत संघ में शामिल नहीं हैं उनको।

भारत का संविधान-संघ एवं राज्य क्षेत्र [अनुच्छेद 1 से 4] तक में अब हम जानते हैं अनुच्छेद 3 को

अनुच्छेद-3ः– नये राज्यों का निर्माण व वर्तमान राज्यों के सीमाओं में और नामों में परिवर्तन, अनु. 3 के तहत संसद चाहे तो किसी राज्य की सीमा में परिवर्तन कर सकती हैं  किसी राज्य के नाम में परिवर्तन कर सकती हैं किसी राज्य के क्षेत्र को बढा सकती हैं घटा सकती हैं

लेकिन कोई भी परिवर्तन करने से पहले संसद को राष्ट्रपति से पूर्व अनुमति लेनी होगी राष्ट्रपति इस अध्यादेश को सम्बधित राज्य का मत जानने के लिए भेजेंगे, यह मत निश्चित समय सीमा के अन्दर देना होता हैं। यह समय सीमा राष्ट्रपति तय करेंगे, हालांकी संसद और राष्ट्रपति राज्य का मत मानने के लिए बाध्य नहीं हैं वे स्वीकार भी कर सकते हैं अथवा अस्वीकार

अनुच्छेद-4ः- अनु. 2 व 3 में परिवर्तन की शर्ते, अनुच्छेद 4 में यह
बताया गया हैं की अनु. 2 के अन्र्तगत नयें राज्यों का गठन तथा अनु. 3
के अन्र्तगत नामों व क्षेत्रों में परिवर्तन अनुच्छेद 368 में जो प्रक्रिया हैं
उसके तहत नहीं होगा।
अर्थात हमें अनुच्छेद 368 समझना होगा

अनुच्छेद 368 में संविधान संसोधन कैसे होता हैं यह बताया गया हैं 

अनुच्छेद 368 में संसोधन  बताया हैं वो दो प्रकार का हैं
1 विश्ष्टि बहुमत
2 विश्ष्टि बहुमत & राज्यों का बहुमत

लेकिन संविधान संसोधन तीन प्रकार का होता हैं तीसरा संसोधन ‘‘सामान्य बहुमत’’ से होता हैं अर्थात अनुच्छेद 4 यह कहता हैं की अनुच्छेद 2 व 3 में जो परिवर्तन होगा वो सामान्य बहुमत से होगा।

State Reorganization Commission and Committee भाग 1 के तहत कई राज्य पुनर्गठन आयोग और समितियां बनाई कौनसी कौनि यहाँ क्लिक करें पढ़े

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